6 जुलाई 2013 - 19:30
मुर्सी सरकार का पतन क्यूं हुआ?

मेडिल ईस्ट आनलाईन वेबसाइट के राजनीतिक विश्लेषक ने अपने लेख में लिखा है कि मिस्र में जो कुछ हुआ है यह कोई संयोग नहीं है बल्कि पक्की योजना और सोची समझी प्लानिंग के अंतर्गत हुआ है क्योंकि मुस्लिम ब्रदरहुड के नेता पूरी तरह राजनीतिक बेवकूफ़ी का शिकार थे और इसी वजह से वह अपने शासनकाल में ऐसी गंभीर ग़ल्तियों के दोषी हैं कि कोई भी राजनीतिक दल सत्ता में आने के बाद इस तरह के काम नहीं करता है।

मेडिल ईस्ट आनलाईन वेबसाइट के राजनीतिक विश्लेषक ने अपने लेख में लिखा है कि मिस्र में जो कुछ हुआ है यह कोई संयोग नहीं है बल्कि पक्की योजना और सोची समझी प्लानिंग के अंतर्गत हुआ है क्योंकि मुस्लिम ब्रदरहुड के नेता पूरी तरह राजनीतिक बेवकूफ़ी का शिकार थे और इसी वजह से वह अपने शासनकाल में ऐसी गंभीर ग़ल्तियों के दोषी हैं कि कोई भी राजनीतिक दल सत्ता में आने के बाद इस तरह के काम नहीं करता है।यह राजनीतिक विश्लेषक मुर्सी सरकार की कुछ गंभीर ग़ल्तियों की तरफ़ यूँ इशारा करते हैं:1: मुस्लिम ब्रदरहुड इस बात को बखूबी समझ नहीं पाई कि मिस्र जैसे देश की सत्ता जिसके हाथ में हो उसे कतर जैसे मामूली देश के आगे झुकने की आवश्यकता है?यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि वहाबी कट्टरपंथी और अक़्ल से पैदल लोग हैं नर्मी और बीच का रास्ता उनके पास से भी नहीं गुज़रा है जबकि मुस्लिम ब्रदरहुड जो उदारवादी गुट था उसके उच्च श्रेणी के लोग भी सल्फ़ी विचारधारा की चपेट में आ गए थे और सल्फ़ियों के साथ जुड़े हुए थे जबकि अगर मुस्लिम ब्रदरहुड अपने दरमियानी रास्ते पर बाक़ी रहते तो वह मिस्र के समाज में अधिक लोकप्रियता हासिल करते। मिस्री समाज सल्फ़ियों के कंट्टरपंथ और कड़े व्यवहार को हरगिज स्वीकार नहीं कर सकता। मिस्र का बहुमत सुन्नियों पर आधारित है और सुन्नी, वहाबियों के मुक़ाबले में नर्म और दरमियानी रास्ते अपनाते हैं और वह उदारवादी हैं, ऐसे में कोई भी सरकार जो सल्फ़ी शैली पर मिस्र जैसे देश में हुकूमत करना चाहेगी तो उसके लिए एक साल भी हुकूमत कर लेना बहुत बड़ी सफलता है।3: मुस्लिम ब्रदरहुड यह नहीं समझ सके कि देश की अध्यक्षता का पद सामान्य संगठनों के अध्यक्ष पद से भिन्न होता है देश का राष्ट्रपति पद पचास प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करके मिला है इसका मतलब यह है कि देश के आधे से ज़्यादा लोग आपके साथ हैं और एक बड़ी संख्या आपकी विरोधी भी है।लेकिन चूंकि मुस्लिम ब्रदरहुड का राजनीति में पहला अनुभव था वह इस चीज़ को ठीक ढंग से हज़म नहीं कर पाए कि देश के लगभग आधे से थोड़े कम लोगों ने आपको वोट नहीं दिए उनका विश्वास आपको कैसे हासिल करना होगा? उन्हें कैसे अपने करीब करना होगा? देश के राष्ट्रपति को पहले चरण में अपने विरोधियों के विचारों को बदलना होता है, उनके विश्वास को अपनी ओर आकर्षित करना होता है ताकि वह उन पर भी हुकूमत कर सके और उन पर भी अपना आदेश चला सके जबकि मोहम्मद मुर्सी अपने विरोधियों के विश्वास को हासिल करने में विफल रहे।4: मुस्लिम ब्रदरहुड की विदेश नीतियों की विफलता का भी एक प्रमुख कारण है जिसकी वजह से यह सरकार ज्यादा देर अपने पैरों पर खड़ी न रह सकी। इस्राइल के साथ नरमी और अमेरिका के साथ दोग़ली नीति न केवल अमेरिका को संतुष्ट न कर पाई बल्कि अमेरिका की दूरी के साथ अपने लोगों की दूरी का भी कारण बनी।मुस्लिम ब्रदरहुड अमेरिका के साथ दोग़ली रवैया इस बात का कारण बना कि वह अमेरिका के सामने एक पाखंडी चेहरा बन कर गया क्योंकि मुस्लिम ब्रदरहुड आंतरिक रूप से अमेरिका के खिलाफ योजना बना रहे थे जबकि यूँ वह अमेरिका से अपने संपर्कों को बढ़ाना चाहते थे। मुस्लिम ब्रदरहुड के नेता हुकूमत में आने से पहले हमेशा अपने भाषणों और लेखों में अमेरिका और इस्रायल की बदगोई करते और उनके खिलाफ आवाज़ उठाते थे और लोगों को वादे दिया करते थे कि सत्ता हासिल करने के सूरत में अमेरिका और इस्राइल से कोई संपर्क नहीं रखेंगे जबकि सत्ता पाने के बाद इसके विपरीत दिखाई दिये। पहले वह हमेशा क़ुद्स की आज़ादी और फ़िलिस्तीन के समर्थन में नारे लगाते थे लेकिन जब सत्ता मिली तो इस्राइल के साथ संपर्क मजबूत बना लिये और इसके विपरीत इस्रायल विरोधी देशों जैसे सीरिया से अपने सम्बंध तोड़ कर अपना राजदूत वापस बुला लिया और इस्राइली प्रधानमंत्री शैमून पेरिज़ को पत्र लिखकर ख़ुद को इस्राईल का ईमानदार, वफ़ादार और हितैषी दोस्त पेश किया।मुर्सी सरकार की एक महत्वपूर्ण कमज़ोरी यह भी थी कि वह ओर्दोगान के जाल में फंस गए जबकि इस जाल में सिर्फ सादे और मूर्ख लोग फंस सकते हैं। ओर्दोगान ने मुर्सी को संतुष्ट किया कि वह हमास में पाए जाने वाले अपने प्रभाव से लाभ उठाते हुए हमास के लीडर को अपनी सलाह दे कि वह इस्राइल पर हमले को रोकने और इसराइल के खिलाफ़ गाजा पट्टी पर किसी तरह की कार्यवाही न करे। इसके मुकाबले में.... कुछ नहीं, केवल इस्राइल अपने फिलिस्तीन में रोज़ाना के हमलों को रोक देगा। हालांकि इससे पहले फ़िलिस्तीन से इस्राइल पर किए जाने वाले हमलों से इस्राइल पर दबाव पड़ रहा था और वह हमले फ़िलिस्तीन के प्रतिरोध का सबूत थे। अगर फ़िलिस्तीन अपना प्रतिरोध रोक दे और चुपचाप बैठ जाए तो इस्राईल भी अपने हमले बंद कर देगा तो नतीजा यह होगा कि यह समस्या जहां है वहीं खत्म हो जाएगी जो क्षेत्र इसराइल के क़ब्ज़े में है वह बाक़ी रहेगा और फिलिस्तीन के अधिकार में जो कुछ बचा है वह उसी पर संतुष्ट रहेगा।हमास के लीडर भी ओर्दोगान बल्कि इस्राइल द्वारा बिछाए हुए जाल को नहीं समझ सके और उसने मुर्सी के सुझावों पर अमल कर प्रतिरोध रोक देने का फैसला कर लिया और गाज़ा पट्टी में डटे फिलिस्तीनी सिपाहियों को केवल सुरक्षा बलों में बदल दिया।मुस्लिम ब्रदरहुड के एक वर्षीय कार्यकाल की यह बड़ी ग़ल्तियां थी जिनकी वजह से वह एक साल से ज़्यादा नहीं चल सके। बहेरहाल मिस्री जनता पर अल्लाह का करम हुआ और इससे पहले ही यह कठपुतली तम्बू सिमट गया कि मिस्र के मुस्लिम एक एक करके दीन से बाहर हो जाते।